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TULIP BROOK SAYS… In a world full of hate, Lets pour some love,through soothing drops of poetry.

संगीत

संगीत क्षण क्षण में संगीत,कण कण में संगीत,हर श्वास में संगीत,हर आभास में संगीत | सागर के ठहराव में,नदी के बहाव में,झरनों की हुंकार में,वृष्टि की बौछार में,नीर के हर रूप में,हर बूँद में है संगीत | मरुस्थल के अनुर्वर में,घासस्थल के उर्वर में,भूमि की हर माटी में,चट्टानों में,घाटी में,है संगीत | बयार की अनवरत… Continue reading संगीत

वेदना

वेदना की आवृत्ति जब जब उजागर होती गई, तब तब एक गूढ़ शक्ति उसे तिरोहित करती गई, मानो जैसे इस अपरिमय अनन्त के, अस्तित्वहीन सिरों से मुद्रित होती गई, निदोल सा ये जीवन होता गया, ह्रदय जितना इसका अवशोषण करता गया, अभिव्यक्ति उतनी ही तीव्र होती गई, दोनों में द्वन्द्व बढ़ता ही गया, और यूँही… Continue reading वेदना

आभास

ये अश्रुधारा कोई आगंतुक नहीं,निवासी है इस ह्रदय द्वीप की,इसका आगमन नहीं हुआ कभी,ये आरम्भ से है विभव लिए,एक सैलाब के अस्तित्व का,मगर स्थिर रहती है फिर भी,प्राण वेग को  उत्प्लाव देती हुई,ठहराव की सुगम प्रबल स्तिथि से,रिसाव की विश्रृंखल दुर्बल अवस्था में,तब ही आती है ये,जब होता है एक निर्दयी आघात,इसके धैर्य पर,इसकी स्तिरथा… Continue reading आभास

सिया के राम

विरह के ताप में,प्रेमाग्नि प्रज्वलित हुई,औरह्रदयों को सौहर्द मिलता रहा |सिया की गरिमा की रक्षा,राम के शौर्य की परीक्षा,दोनों ही इस अग्नि ने की |और प्रदान हुई,तिमिर बेला से आतंरिक दृष्टि,औरइस व्याकुल मन को संतुष्टि |प्रेमाग्नि ने आत्मबल दिया,हर शंका का हल दिया,सिया और राम के,मिलन के मार्ग बनते गए,साथी और सारथी दोनों ही,इस मार्ग… Continue reading सिया के राम

इंदुकला

इंदुकला ये मन ही तो है-शीतल भी,उग्र भी,कभी शाँत,कभी चँचल,ठहराव लिए कभी,कभी गतिशील भी,कभी उदासीन,कभी उल्हास पूर्ण,कुछ वक़्त छिपा हुआ,अपने ही ख्यालों में,ढूंढ़ता हुआ उत्तर,अनकहे सवालों के,तिमिर में शोध करता हुआ-अस्तित्व की,व्यक्तित्व की,सत्य की,मिथ्या की,प्रत्यक्ष की,परोक्ष की,हर भाव की,भावहीनता की,शून्यता का आभास,करते हुए |फिर धीरे धीरे,उभरने के लिए,एक नूतन प्रकाश लिए,हर सवाल के उत्तर के… Continue reading इंदुकला

नीर

नीर समझकर हमें जिन्होंने,सिर्फ़ एक अनुयायी के रूप में ही देखा,और ये ही अपेक्षा करते रहे,कि ये तो नीर है,जैसा भी दायरे दोगे,ये उस दायरे में समा जाएगा |वो ये नहीं समझ पाए कभी,कि समायोजन करके इसका,अनुनेय व्यक्तित्व वाला नीर भी,एक हद्द के बाद,हर सीमा,हर दायरे को पार कर,सिर्फ़ एक ही काम करता है,सैलाब लेकर… Continue reading नीर

बाज़ार

संसार के इस बाज़ार में,लिए खड़े हैं तराज़ू सब,हर रिश्ते का वज़न,तुलता है जहाँ हर रोज़,अपेक्षाओं और ज़िम्मेदारियों के पलड़े में,बिकता है वक़्त,कीमत होती हर जज़्बात की,रत्ती रत्ती हो जाता है मिलना मुश्किल,औरखोने को होते हैं हिस्से हज़ार |उसी बाज़ार के एक कोने में,बिना तराज़ू खड़ा है,इंसानियत का रिश्ता हथेली में लिए,हर वो बच्चा अनाथ,जिसे… Continue reading बाज़ार

Nature

Nature is never problematic.It acts in its most harmonious way.It takes its own course with time.Its the humans who are problematic-problem for each other,problem for other creatures,andproblem for nature too.Hastiness, greed, and a sense of false pride makes humans the most problematic of all creatures existing on this planet. NATURE : HUMANS : COEXISTENCE

Marriage

The sanctity of the connubial thread lies in evolving through disagreements, through uncomfortable confrontations, through low times, through fears and weaknesses.It’s about being each others’ mirror.It’s about helping and supporting each other no matter what.It’s about the willingness to give.It’s about the deep desire to nurture each other and bring out the best in each… Continue reading Marriage

Religion

” Jaki rahi bhavna jaisiPrabhu murat dekhi tin taisi” Tulsidas Different expressions of the one divine source.Paths are different,Destination is the same.Therefore, so many gods in hinduism.Therefore so many rituals, festivals, mantrasBut a truly spiritual person will go beyond all this.He will move towards experiencing shunyata-A state of nothingness(The essence of one’s existence). GOD :… Continue reading Religion

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