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TULIP BROOK SAYS… In a world full of hate, Lets pour some love,through soothing drops of poetry.

मुखौटे

ना जाने कितने ही चेहरे,ना जाने कितनी ही पहचान हैं,इस दुनिया के रंगमंच पर,ना जाने हर किरदार,पहनता है कितने ही मुखौटे |कभी मुखौटा लहराती ख़ुशी का,भीतर अपने ग़म का सागर लिए,कभी मुखौटा ग़म के बादल का,बिन अश्कों की बारिश लिए,उसी मुखौटे से –किसीके सामने हँसता है,किसीके सामने रोता है,किसीसे मुँह फेरता है,किसीकी ओर ताँकता है,कभी… Continue reading मुखौटे

दूरी – नज़दीकी

वो फ़लक –जो कभी हासिल ना हो सका,मगर ख्वाहिशों की फ़ेहरिस्त में,सबसे आगे रहा हमेशा | और ये ज़मीन –जो हमेशा हमारी ही रही,मगर हमारे साथ के लिए,रज़ा मंदी का इंतज़ार करती रही | इंसान को हमेशा,कद्र और फ़िक्र,नाक़ाबिल – ए – रसाई तोर प्यार की ही होती है |

इतिहास

इतिहास ये –गेरुआ सा,धुँधला सा,घटता हुआ |ईमारतें टूटी फूटी सी,दीवारें भी दरारों भरी,धरोहर फिर भी मज़बूत,स्तम्भ ये अडिग खड़े हुए \पत्थरों पर जमी वक़्त की काई,ज़मीन पर पनपती प्रकृति,ये संतुलित सा आकार,ना अब तक बंजर हुआ,ना ही बसेरा बना |प्रदीप्ति

अधूरा

अधूरा किसीको घर ना मिला, किसीको घरवाले, कोई माँ की छाया के बिना पका, तो कोई पिता की डाँट बिना, कोई बेऔलाद रहा, कोई औलाद खोता गया, कहींभाई को बहन की आस रही, तो कहीँ बहन को भाई की, कोई प्रेमी ढूँढ़ता रहा, तो कोई बदलता, कोई अपने कद को रोया, तो कोई अपने रंग… Continue reading अधूरा

सन्देश

बादल के लिफ़ाफ़े में छुपाकर, आज रोशनी भेजी है, इस सूने तन्हा आसमान ने | और डाकिया बनी है, मदमस्त सी ये फ़िज़ा, ताकि मीलों के ये फ़ासले, आसानी से तय हो सके, मगर शुल्क लगाया इस मौसम ने, कुछ हिस्सेदारी अपनी भी माँगी, ले ली कुछ किरणें फिर, और बाकी वहीं रहने दी |… Continue reading सन्देश

स्पर्श

उठा लेती हूँ उन्हें भी,बड़े ही स्नेह से,जिन्हें खुदके प्रियवर ने त्याग दिया,मालूम है मुझे ये सच्चाई,इस स्नेह से ये फिर घर नहीं जा पाएँगे,मगर कुछ क्षणों का कोमल स्पर्श,इन्हें सुकून ज़रूर देगा,नश्वरता को आलिंगन में लेने के लिए,स्वैच्छा से, मधुरता से,मिट्टी में विलीन होना भी आवश्यक है,इस काल चक्र के संचालन के लिए,फिर उजागर… Continue reading स्पर्श

अवशेष

अवशेष एक अस्तित्व था,जिसकाआकार भी,रूप भी,छवि भी,औचित्य भी,जोकाल बध्य होकर,पूर्ण था,मगरक्षण क्षण घटता गया,उसका आकार,उसका रूप भी,उसकी छवि,उसका औचित्य भी,और आज जो प्रत्यक्ष है,वो सिर्फ़ अवशेष हैं,अधूरी कहानी से,किसीके इतिहास के,जो सिर्फ़ तर्क वितर्क,और अनुमान के दायरे में,सीमित रहकर,एक शोध का विषय बन जाएँगे,मगरक्या कभी भी,इस अवशेष का,सत्य हम जान पाएँगे?

Shadow

A momentary truth,Of an eternal reality,And a constant juggle,Between perception and memory.A shadow gives a glimpse,Of the fleeting nature,Of this existence,Nothing remains forever,In the limited domain,Of this physical perception,Yet its essence stays,In some form or the other,In the boundless realm,Of this metaphysical memory.

वक़्त

वक़्त पानी सा बहता गया,जीवन की नाव चलती गयी,कई छोर छूटते गए,किनारे भी धुंदले होते गए,और अब ये मंज़र है,कि गहराई रास आने लगी है,अब ना किसी छोर की तमन्ना,ना ही किसी किनारे की आस बची है |

समय

समय की गाड़ी चलती रही,पलों के कई डब्बे लिए,मुलाक़ातों के स्टेशन आते रहे,सफ़र ये जीवन का,यूँही बस चलता रहा |अब गाड़ी तो चली गई,डब्बो को अपने संग लिए,स्टेशन भी अब छूट गए,बस अब यादों की ये पथरियाँ बाकी हैं |

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