Spiritual, Mythology, philosophy

सिया के राम

विरह के ताप में,
प्रेमाग्नि प्रज्वलित हुई,
और
ह्रदयों को सौहर्द मिलता रहा |
सिया की गरिमा की रक्षा,
राम के शौर्य की परीक्षा,
दोनों ही इस अग्नि ने की |
और प्रदान हुई,
तिमिर बेला से आतंरिक दृष्टि,
और
इस व्याकुल मन को संतुष्टि |
प्रेमाग्नि ने आत्मबल दिया,
हर शंका का हल दिया,
सिया और राम के,
मिलन के मार्ग बनते गए,
साथी और सारथी दोनों ही,
इस मार्ग पर जुड़ते गए |
नियति का इस तरह से न्याय हुआ,
सियाराम का ये मिलन,
प्रेम का पूर्ण अभिप्राय हुआ |
समर्पण सत्य के प्रति,
त्याग भौतिक तृष्णाओं का,
नियंत्रण मानवीय विकारों का,
धैर्य प्रतिकूल परिस्थितियों में,
विश्वास काल के परिवर्तन में,
पावनता प्रेम भाव में,
करुणा हृदय में,
कर्मठता धर्म के उत्तरदायित्व की,
पराक्रम क्षत्रिय सा,
राम के व्यक्तित्व में,
प्रचण्ड रूप से उजागर हुआ,
और
इस तरह काम आई,
ये प्रेमाग्नि,
सिया के मान की रक्षा के,
महा युद्ध में,
जहाँ
बल और बुद्धि का,
अनूठा संतुलन लिए,
राम ने पराजित किया,
धर्म और न्याय के दायरे में,
नियति का अभय रूप बनकर,
रावण के
इस लोभ को,
अनगिनत विकारों को,
अहंकार को,
दुर्व्यहार को,
और
पा लिया अनन्त के लिए,
इस प्रेम को,
सिया वर राम के रूप में |

प्रदीप्ति

#dussehra2022 #siyaram #prem #dharma

Spiritual

Religion

” Jaki rahi bhavna jaisi
Prabhu murat dekhi tin taisi”

  • Tulsidas

Different expressions of the one divine source.
Paths are different,
Destination is the same.
Therefore, so many gods in hinduism.
Therefore so many rituals, festivals, mantras
But a truly spiritual person will go beyond all this.
He will move towards experiencing shunyata-
A state of nothingness
(The essence of one’s existence).

GOD : RELIGION : FAITH

दर्शन, philosophy, Spiritual

नमी

सतह सुर्ख है,तृष्णा गहरी है,प्रेम का असीम समंदर है अन्दर,फिर भी ना जाने कैसी अजब कमी सी है |उठता है तूफ़ान इस कदर,हर पल फूटना चाहता हो जैसे,मगर ये अश्क़ बहते भी नहीं,दो बूँद नैनों में झलकती भी नहीं,जबकि श्वासों से लेकर देह तक इतनी नमी सी है |क्यूँ फैला है अनन्त तक,ये खालीपन ?ना अँधेरा है ना ही रोशनी,ना नज़र आता ऊपर ये आसमान,और ना ही महसूस होती नीचे कोई ज़मीन सी है |कुछ रुका भी नहीं,कुछ बहा भी नहीं,कुछ दिखा भी नहीं,कुछ छुपा भी नहीं,कोई आरज़ू भी नहीं,कोई शिकायत भी नहीं,ना ही बेबसी है,ना ही बेचैनी है,ना जाने कैसी रहस्यमयी एहसास है ये,कभी ना तृप्त होने वाली वीमोही प्यास है ये |

दर्शन, L, philosophy, Soulful, Spiritual

निष्क्रिय

© tulip_brook

जैसे प्रवाह, वृद्धि के अंतर्गत,

विराजमान एक स्थिर रहस्य,

जैसे ध्वनि, कथन के भीतर,

विद्यमान एक गूढ़ मौन,

वैसे ही नश्वर देह के अन्दर,

स्तिथ एक मर्म अमृत |

इस जीवन में -जो प्रत्यक्ष है,

वो पूर्ण सत्य नहीं,

और

जो परोक्ष है,

वो अर्द्ध मिथ्या नहीं |

जीवन : प्रत्यक्ष : परोक्ष

दर्शन, philosophy, Soulful, Spiritual

रास्ता

Source : Aakash Veer Singh Photography

रास्ता ये ख़त्म होते जब नज़र आया ,

एक अदृश्य राह प्रारम्भ हो गई,

मुसाफ़िर सा मैं यूँ सोचने लग गया,

ये कौनसी आरज़ू उजागर हो गई,

धरा से जुड़े थे देह और ये साया,

मगर अब इन्हें नीर से मिलन की चाहत हो गई,

बाहर एक कदम जब हौसले का उठाया,

तब अन्दर भरी शंका कहीँ खो हो गई,

धीरे धीरे मैं इस जल में सुकून से यूँ बहता गया,

जैसे सदियों पुरानी तड़प की ये तलाश ख़त्म हो गई,

और फिर देह और इस साये को मैं यूँ त्याग आया,

जैसे आत्मा की इस बंधन से सदा के लिए मुक्ति हो गई |

रास्ता : धरा : नीर

दर्शन, philosophy, Spiritual

आलोक

Credits : Aakash Veer Singh Photography

तड़प तिमिर त्याग की,

तृष्णा ताप तंकन की,

आस आलोक आलिंगन की,

आकांक्षा अंकुरित अंतर्मन की,

वृहद विवेचन वैराग्य का,

सरल संलाप साध्य का,

सफ़र सुदृढ़ स्तिथि का,

विराम व्याकुल वृत्ति का,

प्राप्ति पुण्य परमानन्द की |

अलोक : ताप : परमानन्द

दर्शन, philosophy, Soulful, Spiritual

The Echo of the Divine

© Aakash Veer Singh Photography


The sweet moment of twilight,

And the sky above,

Ready to adorn the blanket,

Of a dark blue shade.

The stillness in the air,

The peace in the ambience,

The divinity’s sandstone idol,

Fragrance of mogra, sandalwood, and camphor,

And the mellow smell of the wet soil.

A flame emblazens much brighter,

As the darkness slowly sets in,

With the sound of the conch and the bells,

The reverberating utterance of the rhythmic mantras,

And the infallible faith of the engrossed devotees.

Indeed, this is true devotion,

When, everything comes to a standstill,

And is ready to be ingested in one’s soul,

And then get completely soaked,

In the ocean of this gaiety,

And surrender oneself,

In dance,

In music,

In emotions,

In expression,

In joy and ecstacy,

Where one experiences the ultimate truth,

A glimpse of the divine.

divine : echo : bliss

दर्शन, philosophy, Spiritual

Divinity in Stone

We pray to God in a form that makes us connect with the higher power in an easy manner. Idols made of stone are the most commonly seen in every temple or under a sacred tree or a siddh place. I chanced to witness this beautiful ganesha idol at a stone art workshop and it immediately caught my attention. A flow of bhakti bhaav poured out from deep inside, in the form of poetry.

The countenance of abundance,

But a stance of minimalism,

Your demeanor exhumes unbridled joy,

And a charm so serene,

I gaze in awe at your magnetism,

As I feel the divine aura,

Touch my mortal existence,

Bringing it a step closer,

To the reality of this life,

Yet obscuring its fullness,

Leaving room for bhakti to evolve,

With patience and purity.

bhakti : divinity : ganesha

दर्शन, poetry, Soulful, Spiritual

प्रेम की बूँदें

ये जीवन एक नीर सा,

बहता रहता है हर पल,

कभी शाँत, तो कभी उग्र,

कभी असन्तुलित, तो कभी समतल,

कभी शीतल, तो कभी ऊष्ण |

आज,

इस नीर को हथेली में भरकर,

प्रेम का रूप दिया,

और कुछ इस कदर,

मीत पर इसकी बौछार हुई |

कुछ बूँदें समावेश की,

खुद में तुझको विलीन करके,

आलिंगन आत्माओं का हुआ |

बूँदें हर्ष की, उल्लास की,

बतलाती,

प्रेम को महसूस करना ही,

उत्सव है जीवन का |

बरसी बूँदें करुणा की,

शालीन और कोमल एहसास लिए,

दर्शाती मधुरता प्रीत की |

शेष बूँदें संवेदना की,

भेंठ के रूप में,

मीत को अर्पित करते हुए,

समर्पण और त्याग,

जो ज़रूरी है,

प्रेम ही नहीं,

इस नीर के सदा बहते रहने के लिए |

दर्शन : पवित्र : प्रेम

philosophy, poetry, Spiritual

The call of the divine

How one experiences the divinity is a mystery in itself. But whatever be the experience, it’s worth sharing. I am sharing my experience in the form of a short poem.

The morning temple bells,
And the breezy lake side,
The lemony fresh sky,
And the fragrant marigold petals,
The ivory conch echoes,
And the invigorating mantra sounds,
The soothing camphor fire,
And the cleansing holy water,
The clamor of the devotees,
Brought to a dead silence,
By the sheer divine presence,
Not outside as a diety, but within oneself.

divinity : existence : bliss