दर्शन, poetry, Soulful

आलिंगन और अश्क़

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जब सागर सा गहरा ये दर्द,

भीतर रहता हो अदृश्य,

घुटता हुआ हर स्वाश में,

रुकता ठहरता मगर फिर भी अस्थिर सा,

बेचैन और सा बहने के लिए,

करता इंतज़ार सदियों तक,

थोड़ा थोड़ा यूँ खिसकता,

जैसे चलना भी गुनाह हो कोई,

इस कदर बढ़ती रहती उसकी कसक,

प्रबल और प्रचण्ड बन जाती,

वक़्त के साथ |

जब मिलता अवसर,

एक लम्बे अंतराल के बाद,

वो बहती नहीं अब,

बस फूट जाती,

किसी तूफ़ान की तरह |

उसे कर पाता नियंत्रित,

सिर्फ़ आलिंगन,

कोमल स्पर्श और सौहार्द भरा,

फिर बह पाता ये दर्द,

अश्कों की धारा में,

उस वक़्त तक,

जहाँ सुकून भर जाए फिर से,

हर स्वाश में |

आलिंगन : अश्क़ : दर्द

दर्शन, poetry, Soulful, Spiritual

प्रेम की बूँदें

ये जीवन एक नीर सा,

बहता रहता है हर पल,

कभी शाँत, तो कभी उग्र,

कभी असन्तुलित, तो कभी समतल,

कभी शीतल, तो कभी ऊष्ण |

आज,

इस नीर को हथेली में भरकर,

प्रेम का रूप दिया,

और कुछ इस कदर,

मीत पर इसकी बौछार हुई |

कुछ बूँदें समावेश की,

खुद में तुझको विलीन करके,

आलिंगन आत्माओं का हुआ |

बूँदें हर्ष की, उल्लास की,

बतलाती,

प्रेम को महसूस करना ही,

उत्सव है जीवन का |

बरसी बूँदें करुणा की,

शालीन और कोमल एहसास लिए,

दर्शाती मधुरता प्रीत की |

शेष बूँदें संवेदना की,

भेंठ के रूप में,

मीत को अर्पित करते हुए,

समर्पण और त्याग,

जो ज़रूरी है,

प्रेम ही नहीं,

इस नीर के सदा बहते रहने के लिए |

दर्शन : पवित्र : प्रेम