दर्शन, philosophy, poetry

सड़क

रोज़ गुज़रते हैं यहाँ से,

भोर के ख़ुशनुमा ख़्वाब कई ,

दोपहर की उजली उजली सी ये उमंग,

साँझ की अचल निराशा,

और रजनी का गहरा चिंतन भी |

हर उम्र यहाँ ठहरती है,

अपने अपने हिसाब से,

फलों की फेरी लगाता वो नौजवान,

करता उम्मीद दो रोटी की,

सुबह की बस का इंतज़ार करता,

वो छोटा सा बच्चा,

मिलने को उत्सुक अपने दोस्तों से,

साइकिल पर कॉलेज जाते,

दोस्त यार कई,

बेफ़िक्र दुनिया की परेशानियों से,

स्कूटर पर दफ़्तर जाते वो अंकल,

देने एक सुरक्षित जीवन,

अपने परिवार को,

यूँही पैदल चलती वो गृहणी,

हाथ में सब्ज़ी का थैला लिए,

गृहस्ती की ज़िम्मेदारी निभाती हुई,

लाठी संग हौले हौले चलती,

दादा नाना की ये टोली,

करने सैर और बात चीत |

कोई यहाँ उम्मीद छोड़ जाता है,

कोई थकान और शिकन,

कोई यहाँ आने वाले वक़्त की ख्वाहिशें,

कोई बीते हुए पलों की रंजिशे |

कभी यहाँ जश्न होता है,

कभी शोक और मौन भी,

कभी यहाँ काफिले निकलते हैं,

कभी सुनसान आहटें भी,

कभी यहाँ खिलती हैं मुस्कान,

कभी झड़ती मुरझाए साँसें भी,

सब कुछ यहीं होता है,

हर रोज़, हर पल,

यूँही ये सड़क बन जाती है,

एक अहम् हिस्सा,

सबके जीवन का |

दर्शन, inspiration, philosophy, Soulful

उम्र

Credits : Aakash Veer Singh Photography

नश्वर होना यही है,

माप लेते हो अस्तित्व को,

उस प्रणाली के दायरे में,

जो इन्सानों द्वारा बनाई हुई,

इन्सानों के लिए |

जैसे हम मनाते हैं,

जन्मदिन और सालगिराह,

और पकते हैं ये रिश्ते,

उम्र और वक़्त गिनकर,

वैसे ही बढ़ती है ये ज़िन्दगी,

दो संख्याओं के बीच,

और तय करती है ये सफ़र,

जो बदलता है पल पल,

एक संख्या से,

दूसरी संख्या तक |

उम्र : संख्या : जीवन