philosophy

कटपुतली

कटपुतली

रंग हैं,
रूप भी,
आभूषण है,
वस्त्र भी,
मगर
बेज़ुबान हैँ,
बेजान भी |
आओ इनमें प्राण भर दें,
अपनी अपनी आवाज़ देदे,
चुन लो किरदार कोई,
हो जाओ तैयार सभी,
आज साजेगा रंगमच,
और होगा एक नाटक,
अभिनय और रास का,
होगा रमणीय खेल,
तारों को बाँधो उँगलियों में,
और जोड़ दो इन पुतलो से,
नचाओ इन्हें फिर,
अपनी ही ताल पर |
देदो इन्हें आवाज़ अपनी,
जो मन चाहे व्यक्त करो,
हर किरदार में छोड़ दो,
अपने अस्तित्व का अंश कहीँ |

रंगमंच : खेल : कटपुतली

दर्शन, inspiration, philosophy

प्रकृति का रंगमच

© tulip_brook

शाम का ये मलमली पर्दा,

बैंगनी गुलाबी रंग लिए,

धीरे धीरे हटने लगा है,

क्यूँकि वक़्त आ गया है,

रात के अद्भुत नाट्य का |

किरदार भी दिखने लगे अब,

कुछ धुँदले से,अधूरे से,

तैयार खड़े इंतज़ार में,

अपने अभिनय प्रदर्शन के लिए |

चाँद हया में छिपा हुआ है,

बदली की ओढ़नी लिए,

कुछ सितारे ओझल से हैं,

नज़र आएँगे कुछ देर बाद,

जब और गहरा होगा ये रंगमच,

और यूँही चलेगा रात भर,

रास इन चाँद सितारों का,

श्वेत श्याम के संगम का,

और

फिर से गिरेगा ये पर्दा,

भोर की मधुर बेला में,

वही बैंगनी गुलाबी रंग लिए |

रंगमच : पर्दा : प्रकृति