poetry, Shayari, Souful

शुकरान

जो काम बदर भी ना कर पाया,

वो आप कर गए,

दो कदम क्या पड़े आपके,

मानों जैसे इस कूचे को,

सैकड़ो चिराग रोशन कर गए |

जज़्बात : चिराग : रोशनी