दर्शन, inspiration, philosophy

प्रतिबिम्ब

© Aakash Veer Singh Photography

जब बना ये जलाशय एक दर्पण,

इस अनछुए आसमान का,

तब खुले अनकहे राज़ कई,

और इन बादलों ने बयाँ किए,

अनसुने उनसुलझे रहस्य कई,

जैसे सम्मुख आ गया हो अतीत,

वर्तमान का नीला दामन ओढ़े,

और बैठा हो तैयार इस इंतज़ार में,

कि कोई तो उजागर करे,

इस प्रच्छन्न जज़्बात को,

गहरे काले अंधकार जैसा,

जिसे समझने का हौसला,

सिर्फ़ प्रेम में होता है,

जैसा हुआ है,

इस जलाशय को,

उस आकाश से |

प्रतिबिम्ब : जलशय : आसमान