दर्शन, philosophy, Spiritual

आलोक

Credits : Aakash Veer Singh Photography

तड़प तिमिर त्याग की,

तृष्णा ताप तंकन की,

आस आलोक आलिंगन की,

आकांक्षा अंकुरित अंतर्मन की,

वृहद विवेचन वैराग्य का,

सरल संलाप साध्य का,

सफ़र सुदृढ़ स्तिथि का,

विराम व्याकुल वृत्ति का,

प्राप्ति पुण्य परमानन्द की |

अलोक : ताप : परमानन्द

philosophy, poetry

ताप

© tulip_brook

प्रभात की धुंध भरी बेला में,

नंगे पैर ही चल पड़ी वो,

वन के काँटेदार रास्तों पर,

कुछ काठ के टुकड़े लाने |

सिर्फ़ मंढा हुआ आटा,

भूख नहीं मिटा सकता,

ताप अनिवार्य है,

इनको भोज्य बनाने के लिए |

ईंधन से ही वाहन चलता है,

और ये जीवन भी |

सुलगते काठ के ऊष्ण से,

जब ये लौह तवा तपता है,

और सिकती है इस पर मद्धम मद्धम,

रोटी कठिन परिश्रम की,

पड़ते हैं जब छाले,

इन कोमल हथेली पर,

और बहता है पानी,

इन जलती आँखों से,

पड़ जाती है हज़ारों सिल्वटे,

इस सूती साड़ी पर,

और चढ़ जाती है काली परत,

इस श्वेत काया पर,

तब बनता है भोज्य ये,

मंढा हुआ आटा,

और ये जीवन भी |

ताप : जीवन : रोटी

inspiration, poetry

मेरा देश

ये भारत नहीं, सब्र और समर्पण की मिसाल है |🙏🙏

भारत

मेरा देश 
सौंधी मिट्टी और तप्ति धूप सा,

 ये प्यारा देश मेरा,

जहाँ पल पल सिक्ता सब्र,

आँच पर अभाव के, 

बचपन में खिलौेने का,

शिक्षा, और सुरक्षा का,

यौवन में नौकरी का,

व्यापार का, और परिवार का,

स्त्री के मान का,

वृध्द के सम्मान का,

गरीब की भूक का,

बेघर के बसेरे का |

इंतज़ार और उम्मीद,

कुछ खुद से,

कुछ सरकार से,

कुछ आत्मबल से, 

कुछ दरख़्वास्त से |

सौंधी मिट्टी सा ये,

इस ताप को राहत देता,

पहली बारिश की बौछार हो जैसे,

सब्र की इस आग को, 

हौले हौले शाँत कर देता |

देश: भारत: सब्र