philosophy, poetry

नीर

नीर समझकर हमें जिन्होंने,
सिर्फ़ एक अनुयायी के रूप में ही देखा,
और ये ही अपेक्षा करते रहे,
कि ये तो नीर है,
जैसा भी दायरे दोगे,
ये उस दायरे में समा जाएगा |
वो ये नहीं समझ पाए कभी,
कि समायोजन करके इसका,
अनुनेय व्यक्तित्व वाला नीर भी,
एक हद्द के बाद,
हर सीमा,
हर दायरे को पार कर,
सिर्फ़ एक ही काम करता है,
सैलाब लेकर आता है |

पटरा कर देना ज़माने का काम था,
हमने तो सिर्फ़ अपना जलवा दिखा दिया |

दर्शन, inspiration, philosophy, poetry

काल

पुरातन से नूतन तक का ये अस्थिर सफ़र,
कारण और प्रभाव के ये बदलते अभिप्राय,
जीवन के ये विभिन्न दार्शनिक दृष्टिकोण,
व्यक्तिगत और सामजिक विचारधारा के ये द्वन्द्व,
कला और व्यापार की अनुपयुक्त प्रतिस्पर्धा,
सार्थकता और निरर्थकता का ये अनसंतुलित तराज़ू,
परंपरावाद और उदरवाद के बीच के ये बढ़ता घटता फ़ासले,
प्रत्यक्ष और परोक्ष का ये बौद्धिक विवाद |

इस काल चक्र में-
सब परिवर्तनशील है,
और सब स्थिर भी,
जो आज अर्थपूर्ण है,
वो कल निरुपयोगी होगा,
जो कल परम्परा थी,
वो आज स्वच्छन्द है |

सब कुछ यहीं है,
हर क्षण,हर पल,
कभी शूक्ष्म रूप में,
कभी प्रचण्ड आकार में,
कभी संकुचित दायरे में,
कभी असीम तथ्य में |

ये ही सुघड़ता है,
ये ही विशिष्टता है,
इस जीवन की |

सोच : काल : दर्शन