दर्शन, inspiration, philosophy, poetry

सन्देश

© tulipbrook @Kanhan Maharashtra

बादल के लिफ़ाफ़े में छुपाकर,

आज रोशनी भेजी है,

इस सूने तन्हा आसमान ने |

और डाकिया बनी है,

मदमस्त सी ये फ़िज़ा,

ताकि मीलों के ये फ़ासले,

आसानी से तय हो सके,

मगर शुल्क लगाया इस मौसम ने,

कुछ हिस्सेदारी अपनी भी माँगी,

ले ली कुछ किरणें फिर,

और बाकी वहीं रहने दी |

इस प्यारी सी सौगात की,

अभिग्राही बनी है ये धरा,

जो इस सन्देश को पाकर,

प्रज्वलित हो उठी,

स्वर्णिम सी हया लिए |

दर्शन, inspiration, philosophy, Soulful

ठहराव

Source : Aakash Veer Singh Photography

जीवन ये गतिशील सा,

क्षण क्षण एक बदलाव है,

रफ़्तार की इस होड़ में,

कहीँ खो गया ठहराव है |

हड़बड़ी हर चीज़ की,

बेचैनी हर बात में |

ना निकल जाए ये वक़्त हाथ से,

इसलिए पल पल खोते चले जाते हैं |

ना कोई सुकून है,

ना कोई संतोष है,

बस एक दूसरे से प्रतिस्पर्धा,

सबसे आगे निकलने की होड़ है |

क्या पाने निकले थे,

क्या खोते जा रहे हो,

रफ़्तार की लालसा में,

ठहराव से वंचित होते जा रहे हो |

ज़रा देखो इस नज़ारे को,

सब कुछ ठहरा हुआ,

ये जल,

ये आकाश,

और ये धरा भी |

रुक जाओ कुछ देर यहीं,

प्रतिस्पर्धा और रफ़्तार को भूलकर,

इस लालसा को त्यागर,

महसूस करते जाओ बस,

इस नज़ारे के कण कण को |

मिलते सिरे गगन, नीर, भूमि के,

जहाँ एक रंग दूसरे में विलीन होकर भी,

अपना अस्तित्व नहीं खोता,

आसमान का नीलपन,

इस पर्वत पर चढ़ता है,

पर्वत का प्रतिबिम्ब,

इस जल में झलकता है,

जल का दर्शन,

ये बादल करता है,

ज़मीन का गेरुआ रंग,

इस जल में घुलता है,

जल का कतरा कतरा,

गेरू रंग लेकर भी,

निर्मल लगता है |

ये सब जुड़े हैं,

फिर भी भिन्न हैं,

एक दूजे में मिले हैं,

फिर भी इनकी,

पृथकत्वता बरकरार है |

ज़रा रुको दो पल यहीं,

महसूस करो कुछ देर ही सही,

और देखो इन आसमान, पहाड़,

ताल, और इस ज़मीन को,

एकाग्र मन से,

तो महसूस करोगे,

एक ही भाव,

ठहराव,

ठहराव,

ठहराव |

गति : जीवन : ठहराव

दर्शन, philosophy, Soulful, Spiritual

रास्ता

Source : Aakash Veer Singh Photography

रास्ता ये ख़त्म होते जब नज़र आया ,

एक अदृश्य राह प्रारम्भ हो गई,

मुसाफ़िर सा मैं यूँ सोचने लग गया,

ये कौनसी आरज़ू उजागर हो गई,

धरा से जुड़े थे देह और ये साया,

मगर अब इन्हें नीर से मिलन की चाहत हो गई,

बाहर एक कदम जब हौसले का उठाया,

तब अन्दर भरी शंका कहीँ खो हो गई,

धीरे धीरे मैं इस जल में सुकून से यूँ बहता गया,

जैसे सदियों पुरानी तड़प की ये तलाश ख़त्म हो गई,

और फिर देह और इस साये को मैं यूँ त्याग आया,

जैसे आत्मा की इस बंधन से सदा के लिए मुक्ति हो गई |

रास्ता : धरा : नीर

Soulful

स्पर्श

दूर इतना है वो,

मगर प्रबल है उसका अस्तित्व,

और

प्रभावशाली है उसकी ऊर्जा,

जो रोज़ छूकर हमें,

प्रज्वलित कर देती है,

कहती है ये लेहलहाती टहनियाँ,

चाहे हम अभिन्न अंग हो किसी ऊँचे वृक्ष का,

या फिर इस धरा पर बिखरे हों यूँही,

ये स्पर्श हमेशा हर्षित कर देता है,

हमारे कण कण को,

जैसे प्रेम हो कोई,

दो जुदा दिलों के बीच,

जो कभी मिल नहीं सकते,

मगर

फिर भी महसूस कर सकते हैं,

बड़ी ही गहराई से,

एक दूजे का स्पर्श,

सिर्फ़ अस्तित्व और ऊर्जा से |

स्पर्श : अस्तित्व : ऊर्जा